(The Chairman)

आदरणीय गुरुजनों , अभिभावकगणों एवं विद्यार्थीयों,

अरुणाचल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडीज में आपका स्वागत करते हुए मैं अत्यन्त प्रसन्नता का अनुभव कर रहा हूँ । अरुणाचल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडीज, भारतवर्ष का सबसे पूर्ववर्ती विश्वविद्यालय है, जो भारत के सभी विश्वविद्यालयों में सर्वप्रथम भगवान सूर्यदेव के दर्शन करता है और यही कारण है कि इस विश्वविद्यालय पर सर्वश्रेष्ट एवं विश्वस्तरीय शिक्षा प्रदान करने की जिम्मेदारी बढ़ जाती है । भौगोलिक रुप से विश्वविद्यालय पूर्वी अरुणाचल प्रदेश के ११ जिलों के मुहाने पर स्थित है । जिससे न सिर्फ पूर्वी अरुणाचल प्रदेश वरन ऊपरी असम एवं नागालैंड के छात्रो के लिए यह वरदान समान हैं । विश्वविद्यालय की भौगोलिक स्थिति इसे देश की एक्ट-ईस्ट नीति के लिए उपयुक्त बनाती है । म्याँमार की सीमा पर स्थित पांगसाउ पास विश्विद्यालय से मात्र २ घंण्टे की दूरी पर स्थित है ।

भविष्य में जब पुराना व्यापार मार्ग खुल जाएगा तो यहाँ से सड़क मार्ग के द्वारा म्याँमार, थाईलैण्ड, लाओस, कम्बोडिया, वियतनाम, मलेशिया तथा सिंगापुर जाना संभव हो जाएगा । सड़क मार्ग द्वारा नामसाई से सिंगापुर की दूरी लगभग उतनी ही है जितनी की कन्याकुमारी की है । जैसा कि हम जानते हैं कि भारतवर्ष एक अरब तीस करोड़ लोगों की जनसंख्या का देश है तो यह स्वभाविक है कि अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तथा उत्पादो का विनिमय करने के लिए हमें व्यापार के लिए नए साथी ढूँढ़ने होगें । इस स्थिति में यह व्यापारिक मार्ग भविष्य में बहुत सारी संभावनाओं के द्वार खोल देगा । ९० के दशक तक ASEAN राष्ट्र भारत को हर क्षेत्र में अपना आदर्श मानते रहे थे किन्तु हमारी उदासीनता के कारण इन देशो नें अपने पास उपलब्ध संसाधनो के बल पर कई क्षेत्रो में उल्लेखनीय प्रगति की है और हम इसके लाभ से वंचित रह गये । आज हमारे पास पुनः एक अवसर आया है जिसमें इन देशो को जोड़कर हम लोग परस्पर लाभकारी संबंध स्थापित कर सकते हैं जिसमें हमारी भूमिका एक बड़े भाई एवं मार्गदर्शक की होगी । हमे यह समझना होगा की हमारी जनसंख्या हमारी सबसे बड़ी शक्ति है जो आने वाले समय में अन्य देशो को व्यापार के लिए एक बड़ा बाजार उपलब्ध कराती है तथा व्यापार संतुलन के सिद्धांतो के अनुसार हमारे लिये नये बाजार एंव अवसर खुलेंगे जिससे हमारे देश में उद्योग धंधो का विकास होगा तथा देश एवं विदेशो में हमारी युवा शक्ति को रोजगार मिलेगा ।

विश्व शिक्षा अभियान (World Education Mission) द्वारा संचालित हमारे विश्वविद्यालय में अनेकों रोजगारपरक पाठ्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं । इस अल्पअवधि में विश्वविद्यालय द्वारा भारतवर्ष के सर्वोच्च मान्यता प्रदान करने वाली संस्थाओ से मूल्यांकन कराकर, मान्यता प्राप्त कर ली गयी है । जिसमें राष्‍ट्रीय अध्‍यापक शिक्षा परिषद (NCTE), भारतीय पुनर्वास परिषद (RCI), भारतीय विधिज्ञ परिषद (BCI) मुख्य हैं । इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय द्वारा अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद् (AICTE) और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् (ICAR) से भी अनापत्ति प्रमाणपत्र प्राप्त कर लिया गया है । सैद्धातिंक रुप से विश्वविद्यालय का विश्वास पाठ्यक्रमों को व्यावहारिक रूप से चलाने का है और इसलिए विश्वविद्यालय द्वारा UGC के च्वाइस बेसड क्रेडिट सिस्टम को आत्मसात किया गया है । विश्वविद्यालय अपनी स्थापना के समय से ही कौशल विकास एवं उद्यमिता के प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है तथा इसके लिए भारतवर्ष के उत्कृष्ट संस्थानों जैसे कि राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC), खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC), उद्यमिता एवं लघु व्यवसाय विकास के लिए राष्ट्रीय संस्थान (NIESBUD) और भारतीय उद्यमिता संस्थान (IIE) से सहयोग स्थापित कर लिया गया है ।

विश्वविद्यालय देश का ऐसा प्रथम विश्वविद्यालय है जिसने भारत सरकार द्वारा अनुमोदित राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचे (National Skill Qualification Framework) को पूर्ण रुप से अपने पाठ्यक्रमों में लागू कर दिया है । आज विश्वविद्यालय में ११ संकाय (विभाग) सफलतापूर्वक कार्य कर रहे हैं और उसके लिए देश भर से अनुभवी एवं कुशल अध्यापकगणों एवं विद्वानो को नियुक्त किया गया है । अपनी स्थापना के पाँच वर्ष के भीतर विश्वविद्यालय द्वारा अनेको ऐसे कार्य किये गये हैं जिससे उसकी ख्याती देश में ही नहीं वरन विदेशों में भी फैल रही है।

आज संसार एक छोटे से गांव में परिवर्तित हो चुका है, संचार के नवीनतम माध्यमों एवं सूचना प्रौद्योगिकी से सभी जानकारियाँ सहज ही उपलब्ध हैं तथा दूर दराज क्षेत्रो में होने वाली छोटी-छोटी घटनायें भी वैश्विक स्तर पर अपना प्रभाव छोड़ रही है । पुराने समय के समान आज वैश्विक स्तर पर कार्य करने के लिए भाषा बाधा नहीं है । विश्व के बहुत छोटे-छोटे राज्य अपनी मूल भाषाओं में कार्य करते हुए विश्व भर में अपनी अमिट छाप छोड़ रहे हैं । ऐसे समय में हमारे पास देश की २२ राष्ट्रीय भाषाओं के लिये भी सामान रूप से अवसर उपलब्ध हैं । हमारे देश में आंग्लभाषा(English) जानने वाले लोगों की संख्या बहुत अधिक है जिससे कि यह भाषा मात्र रोजगार का माध्यम न बनकर देश की मुख्य संवाद भाषा बनती जा रही है । भविष्य में रोजगार के अवसर देने वाली भाषाओं में जापानी, फ्रेंच, स्पेनिश, थाई, इण्डोनेशिया, फिलिपिनो, मलेसियन, बरमीज (Myanmar), वियतनामीज, खमेर (Cambodian) आदि प्रमुख हैं । विश्वविद्यालय द्वारा इस दिशा में उल्लेखनीय प्रयास किये जा रहे है, तथा जल्द ही जापानी एवं थाई भाषा के कार्यक्रम प्रारंभ किये जायेंगे । यह अत्यन्त हर्ष का विषय है कि विश्वविद्यालय को अन्य देशो में स्थित विश्वविद्यालयों के विद्यार्थीयों से संस्कृत, हिन्दी एवं पाली भाषाओं के प्रशिक्षण के लिए प्रार्थनाएं प्राप्त हो रही हैं ।

ऐसे समय में हमें अरुणाचल प्रदेश में एक व्यवाहरिक एवं शैक्षिक क्रान्ति की आवश्यकता है जो हमारे सुंदर प्रदेश को भारतवर्ष के एक उत्कृष्ट राज्य के रूप में वैश्विक स्तर पहचान दिला सके साथ ही भविष्य में होने वाले ASEAN देशों के साथ व्यापार में प्रदेश का एक विशिष्ट स्थान सुनिश्चित हो । विश्वविद्यालय के लिये आवश्यक है कि उच्च शिक्षा में विश्वविद्यालयो के परस्पर सहयोग की नीति का अनुसरण करते हुए आगामी पाँच वर्षो में ASEAN देशो के साथ सांस्कृतिक, सामाजिक एवं शोध के लिए सहयोग बनाया जाए । विश्वविद्यालय ने थाईलैंड के दो विश्वविद्यालयों से सहयोग स्थापित कर लिया हैं तथा म्याँमार, लाओस एवं फिलीपींस के विश्वविद्यालयों से सहयोग की प्रक्रिया अंतिम चरण में है ।

यह देखना सुखद है कि अरुणाचल प्रदेश में राजमार्गो, संचार माध्यमों, पुलो के निर्माण आदि कार्यो में गति आ रही है । इस दृष्टि से आने वाला दशक प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण होगा और ऐसे समय में प्रदेश के नागरिको विशेषकर विद्यार्थीयों का यह नैतिक एवं सामाजिक कर्तव्य है कि वे प्रदेश में होने वाले इन परिवर्तनो को खुले मन से स्वीकार करें तथा प्रदेश में होने वाले विकास कार्यों की गति को बढ़ाने में मदद प्रदान करें । मैं अपने विद्यार्थीयों को यही संदेश देना चाहूँगा कि वे अपने क्षेत्रो में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिये एकजुट हेकर प्रयास करें।

आने वाले समय में अरुणाचल प्रदेश एवं आस-पास के क्षेत्रो में पर्यटन उद्योग के लिये अपार संभावनाये है | निश्चित रूप से यह नये रोजगार के अवसरों के पैदा होने के लिये शुभ संकेत है । हमारे राष्ट्र में आने वाले विदेशी अतिथियों का हमें सम्मान करना सीखना होगा और साथ ही उनके साथ होने वाली छल- कपट की घटनाओं से उन्हें बचाना होगा । हमे ध्यान रखना होगा कि हमारी परंम्परा अतिथि देवो भव की है और इस परम्परा का अनुपालन हमारे देश में पर्यटको के आगमन को बढ़ावा देगा जो कि निसंदेह हमारी अर्थव्यवस्था में एक बहुत ही गुणवत्तात्मक सहयोग होगा । देश के सभी नागरिकों को स्वच्छता का पाठ भी सीखना आवश्यक है । विडम्बना है कि हम लोग साफ़ सफाई को छोटा कार्य मानते हैं जबकि स्वच्छता हमारे जीवन का अभिन्न अंग है । स्वच्छता के लिए हमें किसी पर निर्भर नहीं होना चाहिए । देश के जिम्मेदार नागरिक होने के नाते हम लोगो का कर्तव्य हैं कि हम अपने आस पास के वातावरण को स्वच्छ एवं शांत बनायें । आज सम्पूर्ण विश्व भारत में सृजित योग अभ्यास के द्वारा अपने आप को स्वस्थ रखे हुए हैं जबकि हम लोग गलत जीवन शैलियों का अनुसरण कर रोगों के दलदल में फसते चले जा रहे हैं । अतः यह आवश्यक है कि हम लोग अपनी जीवन शैली में परिवर्तन कर योग के माध्यम से अपने शारीरिक एवं मानसिक संतुलन को बनाये रखें ।

मैंने यह अनुभव किया है कि हमारे यहाँ के युवा सोचते हैं कि देश ने हमें क्या दिया, यह सही नही है, हमारा कर्तव्य देश से कुछ प्राप्त करना न होकर देश को कुछ देना होता है । यदि राष्ट्र का प्रत्येक नागरिक राष्ट्र की प्रगति में सहयोग दें तो राष्ट्र स्वतः ही आगे बढ़ने लग जायेगा । तब हम अनुभव करेंगे की राष्ट्र से हमारी अपेक्षायें स्वतः ही पूर्ण हो रही है ।

एक अन्य महत्वपूर्ण विषय पर्यावरण है, जंगलो की अंधाधुंध कटाई एवं औद्योगीकरण के कारण, हर जगह प्रदूषित होती जा रही है । वायु, मृदा एवं जल प्रदूषण के गंभीर परिणाम प्राप्त होने लग गए हैं, और अगर ऐसा ही चलता रहा तो सम्पूर्ण विश्व एक बड़े संकट में पड़ जायेगा । इससे बचने के लिए हमें अपने पर्यावरण की रक्षा करनी है और अधिक से अधिक वृक्षों को लगाना है । विश्वविद्यालय द्वारा पर्यावरण संरक्षण के लिए समय-समय पर कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं तथा विश्वविद्यालय द्वारा अपने निर्माण की प्रक्रिया में एक भी वृक्ष नही काटने का संकल्प लिया गया है ।

हमारे देश में एक प्रमुख विषय समाज में जातिवाद एवं धार्मिक आडंबरो का उन्मूलन है । देश आज तक अस्पृश्यता एवं छुआ-छूत जैसी बुराईयों को ढो रहा है । मेरा मानना है कि यदि इनका उन्मूलन नहीं किया गया तो शिक्षित होना व्यर्थ है । विश्वविद्यालय से जुड़े सभी लोगो से यह अपेक्षा है कि वे जाति एवं धर्म के नाम पर छुआ-छूत जैसे घृणित कार्यो से बचें । एक मानव को दूसरे मानव से पृथक करने वाली ऐसी सारी प्रथाएँ जिनका मूल जाति एवं धर्म है, सिर्फ निन्दनीय है । हमारे जीवन की सिर्फ एकवाद होना चाहिए और वह है मानवतावाद ।

मैं अरुणाचल यूनिवर्सिटी ऑफ़ स्टडीज में पढ़ने वाले सभी विद्यार्थियों से यही आशा करता हूँ के वे लोग नामसाई में विश्वविद्यालय स्थापित करने के प्रयास की गंभीरता को समझेगें और इस विश्वविद्यालय की स्थापना मे किये गए श्रम का सम्मान करते हुए, विश्वविद्यालय द्वारा सृजित नियमावली के पूर्ण रूपेण पालन करेंगे । साथ ही यह अपेक्षा है कि वे यहाँ चलने वाले विभिन्न पाठ्यक्रमों का पूर्ण लाभ उठायें और अपने जीवन में प्रशस्ति के मार्ग पर अग्रसर हो ।

मैं विश्वविद्यालय से जुड़े सभी लोगो के मंगल की कामना करता हूँ ।

आपका

अश्विनी लोचन